भारत चीन सीमा विवाद: तुलनात्मक दृष्टिकोण

भारत चीन सीमा विवाद 2020

वर्तमान में भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय साझेदारी काफी अव्यवस्थित और असंतुलित परिस्थितियों में जा पहुंची है। पेंगाग झील के पास चल रहा विवाद बढ़ता चला जा रहा है। चीन के आक्रामक रवैए और हमारे सैनिकों के साथ हुए धोखे के बाद संयम के साथ आगे बढ़ाना भारत के लिए मुश्किल होता जा रहा है। ऐसी परिस्थितियों में भारत को भी मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार रहना होगा। इसके लिए हमें चीन और भारत की ताकत, कमजोरी तथा वर्तमान और भविष्य में उत्पन्न होने वाले विकल्पों पर चर्चा करनी होगी जिससे रणनीति तथा दूरदर्शिता को स्पष्टता मिल सके।

तुलनात्मक दृष्टिकोण भारत और चीन के बीच

जनसंख्या – 

चीन की जनसंख्या 1.41 बिलियन है तथा भारत की जनसंख्या 1.32 बिलियन है। इसका अर्थ यह है, कि चीन के पास ज्यादा संख्या में काम करने वाले लोग है।

आर्थिक दृष्टिकोण –

चीन की जीडीपी 14.22 ट्रिलियन डॉलर है और भारत की जीडीपी 2.97 ट्रिलियन डॉलर है। वहीं चीन की पर कैपिटा इनकम $10150 तथा भारत की पर कैपिटा इनकम $2200 है। अनुमान के आधार पर चीन की अर्थव्यवस्था वर्ष 2030 तक 26 ट्रिलियन डॉलर की हो जाएगी वहीं भारत की अर्थव्यवस्था लगभग 12 ट्रिलियन डॉलर की हो जाएगी।

विदेशी मुद्रा भंडार

चीन का विदेशी मुद्रा भंडार भारत के मुकाबले बहुत ज्यादा है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 415 बिलियन डॉलर का वहीं चीन का विदेशी मुद्रा भंडार 3.1 ट्रिलियन डॉलर का है। चीन का गोल्ड रिजर्व भी भारत से कहीं ज्यादा है भारत का गोल्ड रिजर्व 609 टन है वहीं चीन का गोल्ड रिजर्व 1864 टन है।

राजनीतिक दृष्टिकोण

भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था के आधार पर सरकार चलाई जाती है जबकि चीन में कम्युनिस्ट अर्थात समाजवादी व्यवस्था के आधार पर सरकार चलती है। इसी के कारण कठोर से कठोर तथा तानाशाही फैसले लेने में चीन को जरा सा भी समय या विरोध का सामना नहीं करना पड़ता है। वहीं भारत में सभी की सहमति के आधार पर फैसले लिए जाते हैं जिसमें समय लगता है।

रक्षा बजट

रक्षा बजट में भारत दुनिया में चौथा स्थान तथा चीन तीसरा स्थान रखता है भारत का रक्षा बजट 62 बिलियन डॉलर का है। वहीं चीन का रक्षा बजट 178 बिलियन डॉलर का है।

सैन्य क्षमता

सेना के मामले में चीन दुनिया में दूसरा तथा भारत चौथा स्थान रखता है लगभग हर मामले में चीन हमसे दोगुने स्थान पर मौजूद है चाहे वह सैनिकों की संख्या में हो या फिर वाहनों, ट्रकों और टैंकों की संख्या में हो। इसी प्रकार वायुसेना में हम चीन से सिर्फ थोड़ा ही पीछे हैं चीन दुनिया में तीसरे नंबर पर अपना स्थान रखता है और भारत चौथे स्थान पर हैं। नौसेना में भारत दुनिया में छठवां स्थान वहीं चीन दुनिया में चौथा स्थान रखता है।

अंतरिक्ष

दुनिया में अंतरिक्ष की प्रगति के मामले में चीन चौथा स्थान तथा भारत छठा स्थान रखता है। यदि सफलता को पैमाने के आधार पर मापा जाए तो भारत 95% अंतरिक्ष मामलों में सफल रहा है वहीं चीन का यह आंकड़ा लगभग 90% है। भारत के 115 उपग्रह वहीं चीन के 250 उपग्रह पृथ्वी की कक्षा में मौजूद है।

कूटनीति दृष्टिकोण

पहले की तुलना में हम आज कूटनीतिक दृष्टि से काफी हद तक ज्यादा ताकतवर और सक्षम हुए हैं। आज अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर ना सिर्फ हमारी बातों को सुना और समझा जाता है बल्कि कई कठिन मुद्दों पर हमारी राय को भी महत्व दिया जाता है।

मानव संसाधन

चीन के पास भारत की तुलना में अधिक योग्य और सक्षम मानव संसाधन मौजूद है जो कि चीन के एक बहुत बड़े भाग में मैन्युफैक्चरिंग डिपार्टमेंट की जरूरत को पूरा करता है। जबकि भारत में मानव संसाधन योग्यता अनुरूप बिल्कुल भी सक्षम नहीं है। जिसके कारण विदेशी कंपनियां भारत की जगह चीन में निवेश करना ज्यादा अहम समझती हैं।

ऊपर दिए गए बिंदुओं के आधार पर यह स्पष्ट है कि वर्तमान में चीन हम से अधिक ताकतवर और सक्षम है। यह परिस्थितियां भविष्य में ना निर्मित हो इसके लिए अभी से ही भारत सक्षम प्रयासों की तरफ ध्यान देना शुरू कर देना चाहिए।

वर्तमान परिस्थितियों से निपटने के लिए भारत को निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान देना होगा

  1. चीन पर आर्थिक निर्भरता को कम करना।
  2. चीन से संबंधित व्यापारिक गतिविधियों के लिए नए नियम-कानून आदि बनाना।
  3. भरोसे के दायरे से चीन को पूर्णता दूर रखना।
  4. भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लघु उद्योग कुटीर उद्योग आदि पर निर्भरता तथा निवेश को बढ़ावा देना।
  5. सैनिक क्षमता को बढ़ाने के लिए उसमें निवेश तथा तकनीकी के साथ-साथ मानव संसाधन के विकास पर भी बराबर ध्यान देने की आवश्यकता है।
  6. अनुसंधान और उसके विकास पर निर्भरता तथा निवेश को बढ़ावा देना।
  7. राजनैतिक तथा कूटनीति नेतृत्व के साथ चीन को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर घेरना तथा उस पर दबाव बनाना।
  8. भारत को अपने पड़ोसी देशों के साथ जैसे नेपाल, भूटान, म्यांमार आदि के साथ संबंधों पर ध्यान देना।
  9. मानव संसाधन को विकसित करना तथा उस पर निवेश करते हुए उसको सक्षम और योग्य बनाना।
  10. चीन के द्वारा शोषित नागरिक या फिर देश जो भी हो उनका समर्थन करना तथा उन को एकजुट करने का प्रयास करना।
  11. भारत की जनसंख्या को नियंत्रित करने का प्रयास करना तथा उसके लिए नियम या कानूनों मे बदलाव करना करना।

निष्कर्ष

भारत को राजनैतिक, आर्थिक तथा सैन्य दृष्टिकोण के अतिरिक्त और भी बहुत सारे क्षेत्रों में कार्य करने की आवश्यकता है जैसे कि चिकित्सा के क्षेत्र में निवेश तथा टैलेंट को बढ़ावा देना, कृषि तथा इससे संबंधित क्षेत्रों में निवेश तथा अनुसंधान को बढ़ावा देना, शैक्षणिक संस्थानों को पहले से बेहतर बनाना, रोजगार की व्यवस्थाओं को बेहतर करना, जनता में जागरूकता का संचार करना, संसाधनों का सुनियोजित रूप से उपयोग करना, भ्रष्टाचार आदि को नियंत्रित करने का प्रयास करना, सभी नागरिकों को अपने कार्य और उसकी जिम्मेदारी तथा उत्तरदायित्व के प्रति सजग तथा सतर्क होना आदि।

हमें इन सभी क्षेत्रों में पूरे मनोबल के साथ कार्य करने की आवश्यकता है। यदि हम चाहते हैं कि भविष्य हमारा सुखदाई हो और चीन की इन नीतियों का हम पूरे जोर के साथ विरोध करने में सक्षम हो तो हमें अपने देश को अपने आप को एक सक्षम, योग्य, आत्मनिर्भर, ताकतवर आदि जैसे कई गुणों के साथ बेहतर बनाने का प्रयास करना होगा। वरना चीन की बढ़ती ताकत के आगे दक्षिण चीन सागर के पास के देशों ने घुटने टेक दिए हैं। कोई भी ताकत के साथ उसका विरोध नहीं करता क्योंकि वह उतना सक्षम नहीं है। चीन उसको आसानी से काबू में कर पाने में सक्षम है। इसीलिए हमें देश के अंदर और देश की सीमा दोनों को ही मजबूत बनाने के लिए अत्यंत कठिन परिश्रम आवश्यकता है।

चीन माने या ना माने पर वह अपने व्यापारिक गतिविधियों तथा उस पर निवेश की वजह से ही, आज ताकतवर या सक्षम हो पाया है। व्यापारिक गतिविधियां बिना आपसी सहमति और समझौते के संभव नहीं है। बिना व्यापार के चीन एक सामान्य राष्ट्र से ज्यादा और कुछ भी नहीं है। ऐसा बिल्कुल नहीं है कि चीन को नियंत्रित नहीं किया जा सकता, व्यापारिक मंचों पर घेर कर तथा उस पर प्रतिबंध लगाकर ड्रैगन को खूंटे से बांधना संभव है। इसके लिए सभी राष्ट्रों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एकजुट होने की आवश्यकता है। इसी से ही हम ड्रैगन रूपी चीन को नियंत्रित कर पाने में सक्षम होंगे।

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